मैं मैं ना रहूँ, और मैं बन जाऊँ।


कुछ पल ऐसे हो ज़िंदगी में,
जब मैं मैं ना रहूँ, और मैं बन जाऊँ।


जब हूँ थोड़ी डरी सी सेहमी सी मैं,
जब कह सकूँ अब बस और नहीं लड़ सकती मैं।
अब बस क्या कहीं ठहर जाऊँ मैं,
कुछ पल सुकून के बिताऊँ मैं।।


कोई हो ज़िंदगी में,
जिसके साथ मैं मैं ना रहूँऔर मैं बन जाऊँ।

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