जब अपने निशाँ ही नहीं होंगे



अपने होने का भी क्या गुमान करना साथी,

अपने तो कल निशाँ भी नहीं बचेंग़े।

कुछ होंगे जो याद करेंगे शायद कुछ दिन,

बाक़ी तो आज भी परवाह नहीं करते होंगे।।


तो बहने से पहले,

थोड़ा अपने लिए जीना।

और बाक़ी उनके लिए जो,

होकर भी दुनिया में, नहीं हैं।।

जो बहने से पहले,

एक बार तो जीना चाहते होंगे।।

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