ज़िंदगी गुज़र रही है

गुज़र रही है ज़िंदगी और गुज़र रही हूँ मैं,
क्या रुकना क्या रोकना चल रही हूँ मैं,
शायद जी रही हूँ मैं |

मंज़िलों को पाना या खोना अपनी किस्मत है,
रास्तों पर चलते रहना तो अपनी ज़रूरत है ||

इन रास्तो को देख सोचती हूँ कही थम तो जाऊं,
बस और आगे ना जाऊं यही रह जाऊं |
फिर वो रास्ते बुलाते हैं - कहते हुए धीमे से,
सिर्फ जिंदा रहना है या जीना भी है ?
मेरे साथ ज़िन्दगी गुजारना है या बस गुज़र जाना है ||

रास्तों पर जब आकर देखा तो इतनी भीड़ में कहा थी मैं, सबके साथ होकर भी कहीं अकेली थी मैं |
हर रास्ते में सोचती रहती हूँ, कैसे बढ़ना है, क्या सही है, क्या गलत ||

संकरे रास्तों पर कभी दब कर चलना है, तो कभी पीछे हट कर फिर आगे बढ़ना है |
चौड़े रास्ते हों तो भी बेफिक्रे नहीं हो सकते, दुसरो को भी आगे जाने देना है कभी, फिर खुद आगे बढ़ना है ||

कहीं ठहरना भी है, लेकिन वो पड़ाव है मुकाम नहीं |
फिर यही सोच नए रास्ते पर निकलना है, मुड़ के देखना भी है, और यादों में खोना भी है ||

हर रास्ते में एक नयी कहानी है, एक नयी मैं हूँ एक नए तुम हो |
खुद को ढूंढना भी है, और उन कहानियो में खुद को खोना भी है ||

मैं उन मंज़िलों में हूँ या रास्तों में, किसी की कहानी में हूँ या नहीं हूँ |
मेरा होना या ना होना ज़रूरी भी है क्या, ये तय करना है ||

मेरा होना ना होना किसी की तकलीफ है, तो किसी की ख़ुशी |
क्या फर्क पड़ता है - कहानी में सब अच्छे हो ज़रूरी तो नहीं ||

जो दिल में हैं उनके साथ अपने सफर की बस कहानियां बुननी हैं |

कितने दिन का साथ है वो कहाँ अपने हाथ है,
बस जितने पल हो सके उनके नाम कर सकूँ |
फिर उन कहानियों से निकलेंगे और रास्ते, और कहानियां... ||

कहानियों में ज़िंदा रहूँ ऐसी हों कुछ कहानियां, वरना ज़िंदा वो भी हैं, ज़िंदा मैं भी हूँ |
गुज़र रही है ज़िंदगी और गुज़र रही हूँ मैं, शायद जी रही हूँ मैं ||

Comments

  1. जिसके शब्दो मे ज़िन्दगी के होने का इतना एहसास हो वो ज़रूर पूरी तवज्जो से ज़िन्दगी जी रहा है और इसमें कोई शक नहीं!!!

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